श्री बगलामुखी कवच स्तोत्र | Shri Baglamukhi Kavach Stotram
Shri Baglamukhi Kavach Stotram In Hindi
श्री बगलामुखी कवच स्तोत्र माँ बगलामुखी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी स्तोत्र है।माँ बगलामुखी को दश महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है, जो शत्रुओं की शक्ति को स्तंभित (नष्ट) करने वाली देवी हैं। यह कवच स्तोत्र विशेष रूप से शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी, वाद-विवाद, नकारात्मक शक्तियों, भय और मानसिक तनाव से रक्षा के लिए इसका पाठ किया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, जो साधक श्रद्धा और नियमपूर्वक बगलामुखी कवच का पाठ करता है,
उसके जीवन में शत्रु शांत हो जाते हैं, वाणी में प्रभाव आता है, निर्णय शक्ति मजबूत होती है, कार्यों में सफलता मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, उसके लिए यह कवच रक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
सबसे शक्तिशाली श्री बगलामुखी कवच स्तोत्र अर्थ सहित हिन्दी में
* श्री भैरवी उवाच *
* श्रुत्वा च बगला पूजां स्तोत्रं चापि महेश्वर।इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं वद मे प्रभो॥१॥
भावार्थ - हे भगवान (महेश्वर)! मैंने बगलामुखी माता की पूजा और उनका स्तोत्र सुना है। अब मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे इस कवच (रक्षा स्तोत्र) का पाठ सुनाइए / समझाइए, ताकि मैं उसका सही रूप से पाठ कर सकूँ और लाभ प्राप्त कर सकूँ।
* वैरिनाशकरं दिव्यं सर्वाऽशुभ विनाशकम्।
शुभदं स्मरणात्पुण्यं त्राहि मां दु:ख-नाशनम्॥२॥
भावार्थ - हे माँ बगलामुखी! आप दुश्मनों और शत्रुओं का संहार करने वाली दिव्य शक्ति हैं। आप सभी अशुभ, नकारात्मक और हानिकारक शक्तियों का विनाश करती हैं। आपका स्मरण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और शुभता आती है। आप मुझे संकट, दुःख और भय से बचाइए।
* श्री भैरव उवाच *
* कवच श्रृणु वक्ष्यामि भैरवि। प्राणवल्लभम्।पठित्वा-धारयित्वा तु त्रैलोक्ये विजयी भवेत् ॥३॥
भावार्थ - हे देवी भैरवी (या माँ बगलामुखी)! मैं अब आपका दिव्य कवच सुनाने जा रहा हूँ। यह कवच प्राणप्रिय और भक्त के लिए अत्यंत शुभ है। जो साधक इस कवच को पढ़े और अपने जीवन में धारण करे, वह त्रैलोक्य (तीनों लोक) में विजयी और संकटमुक्त होगा।
* विनियोग *
* ॐ अस्य श्री बगलामुखीकवचस्य नारद ऋषि: अनुष्टुप्छन्द: श्रीबगलामुखी देवता। ह्लीं बीजम्। ऐं कीलकम्पु रुषार्थचतुष्टयसिद्धये जपे विनियोग:।भावार्थ - पवित्र मंत्र, समस्त ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक, इस श्री बगलामुखी कवच का इसे नारद ऋषि ने दिया या प्रतिपादित किया, यह अनुष्टुप छंद में लिखा गया है, इस कवच के प्रमुख देवता माँ बगलामुखी हैं, माँ बगलामुखी का शक्तिशाली बीज मंत्र; शत्रु नाशक और रक्षा कवच, यह मंत्र सिद्धि और साधना के लिए विनियोजित है, इस कवच के पाठ और जाप के लिए यह मंत्र प्रारंभिक आधार (नियोजन) है।
* शिरो मे बागला पातु ह्रदयैकक्षरी परा।
ॐ ह्रीं ॐ मे ललाटे च बगला वैरिनाशिनी ॥४॥
भावार्थ - हे माँ बगलामुखी! आप मेरे सिर (मस्तक) की रक्षा करें। मेरे हृदय में आपका एकाक्षरी (बीज) मंत्र) स्थापित हो, जिससे शत्रु और नकारात्मक शक्तियाँ मेरे पास न पहुँच सकें। यह शक्तिशाली बीज मंत्र है, जो माँ बगलामुखी की संपूर्ण शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। हे माँ बगलामुखी! आप मेरे ललाट (माथे) पर निवास करें और मेरे शत्रुओं का संहार करें।
* गदाहस्ता सदा पातु मुखं मे मोक्षदायिनी।
वैरि जिह्राधरा पातु कण्ठं मे बगलामुखी॥५॥
भावार्थ - हे माँ बगलामुखी! आप मेरे मुख को हमेशा अपनी गदा (शक्तिशाली हथियार) से सुरक्षित रखें, और मुझे संकट और विपत्ति से मुक्ति (मोक्ष) प्रदान करें। हे माँ बगलामुखी! आप मेरे कण्ठ और जीभ को शत्रुओं की वाणी और नकारात्मक प्रभाव से सुरक्षित रखें।
* उदरं नाभिदेंश च पातु नित्यं परात्परा।
परात्परतरा पातु मम गुह्रं सुरेश्वरी ॥६॥
भावार्थ - हे माँ बगलामुखी! आप मेरे उदर (पेट) और नाभि के क्षेत्र को हमेशा अपनी सर्वोच्च शक्ति से सुरक्षित रखें। हे सर्वशक्तिमान देवी! आप मेरे गुप्तांग / अंतरतम अंगों को भी अपनी परम शक्ति से सुरक्षा प्रदान करें।
* हस्तौ चैव तथा पादौ पार्वती परिपातु मे।
विवादे विषमे घोरे संग्रामे रिपुसंकटे॥७॥
भावार्थ - हे माता बगलामुखी (पार्वती स्वरूप)! आप मेरे दोनों हाथों और पैरों की रक्षा करें। आप मुझे विवाद, कठिन संकट, घातक परिस्थितियों, युद्ध या शत्रुओं के समय में सुरक्षित रखें।
* पीताम्बरधरा पातु सर्वांगं शिवंनर्तकी।
श्रीविद्या समयं पातु मातंगी पूरिता शिवा॥८॥
भावार्थ - हे पीताम्बरधारी देवी (माँ बगलामुखी), आप मेरे पूरे शरीर को अपने दिव्य प्रकाश और शक्ति से सुरक्षित रखें, और मुझे सर्वत्र शुभता और शिवत्व प्रदान करें। हे मातंगी देवी, आप मुझे श्रीविद्या (सिद्धि, शक्ति और ज्ञान) का आशीर्वाद दें, ताकि मैं संकट, शत्रुता और नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रहूँ।
* पातु पुत्र सूतञचैव कलत्रं कलिका मम।
पातु नित्यं भ्रातरं मे पितरं शूलिनी सदा ॥९॥
भावार्थ - हे माँ बगलामुखी! आप मेरे संतान (पुत्र-पुत्री), पुत्रवधू और पति की सुरक्षा करें और उन्हें संकट और हानि से मुक्त रखें। आप मेरे भाई, पिता और पूर्वजों (पितरों) को हमेशा अपने दिव्य संरक्षण में रखें, ताकि उन्हें सभी दुख, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त हो।
* रंध्रं हि बगलादेव्या: कवचं सन्मुखोदितम्।
न वै देयममुख्याय सर्वसिद्धि प्रदायकम् ॥ १०॥
भावार्थ - हे माँ बगलामुखी! आपका कवच (रक्षा स्तोत्र) पूरे शरीर के छिद्रों और अंगों में फैलता है और सभी दिशाओं से मुझे सुरक्षा प्रदान करता है। इसे मुख्य और सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य के लिए ही दिया गया है, और यह सभी सिद्धियाँ (सफलता, समृद्धि, शक्ति, रक्षा) प्रदान करता है।
* पठनाद्धारणादस्य पूजनादवांछितं लभेत्।
इंद कवचमज्ञात्वा यो जपेद् बगलामुखीय ॥११॥
भावार्थ - जो भक्त इस कवच का पाठ (पठन), धारण (मनन) और पूजा (साधना) करता है, वह अपनी इच्छानुसार सभी लाभ प्राप्त कर सकता है। जो व्यक्ति कवच की महिमा को जाने बिना भी इसे श्रद्धा और भक्ति से जपता है, वह माँ बगलामुखी की कृपा से लाभ पाता है।
* पिबन्ति शोणितं तस्य योगिन्य: प्राप्य सादरा:।
वश्ये चाकर्षणे चैव मारणे मोहने तथा ॥१२॥
भावार्थ - जो भक्त या साधक इस कवच और मन्त्र का जाप करता है, वह माँ बगलामुखी की कृपा से शत्रु और विरोधियों की शक्ति को स्तंभित कर देता है, यानी उनके रक्त, मन और शक्ति पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित होता है। यह मन्त्र शत्रु को वश में करने, आकर्षित करने, मारने या भ्रमित (मोहित) करने में प्रभावी है।
* महाभये विपतौ च पठेद्वरा पाठयेतु य:।
तस्य सर्वार्थसिद्धि:। स्याद् भक्तियुक्तस्य पार्वति ॥१३॥
भावार्थ - जो भक्त महान भय, संकट और विपत्ति के समय इस कवच का पाठ करता है या करवाता है, उसके लिए सभी प्रकार की इच्छाएँ पूरी होती हैं और सभी लक्ष्यों में सफलता मिलती है।और यह सफलता श्रद्धा और भक्ति से युक्त साधक को प्राप्त होती है, जिसे माँ पार्वती (बगलामुखी) की कृपा प्राप्त होती है।
* माँ बगलामुखी को शत्रुनाशिनी कहा जाता है। उनका कवच पाठ सभी प्रकार के शत्रु, नकारात्मक शक्तियों और दुर्भावनाओं को निष्क्रिय कर देता है।चाहे कार्य में विरोधी हों, कोर्ट-कचहरी का मामला हो, या जीवन में किसी प्रकार की बाधा, यह कवच सुरक्षा कवच का काम करता है।*
