माँ ज्ञान की जगत में दीपक जला रही है लिरिक्स | Maa Gyan Ki Jagat Me Deepak Jala Rahi Hai Lyrics
Maa Gyan Ki Jagat Me Deepak Jala Rahi Hai Lyrics In Hindi
माँ ज्ञान की जगत में,दीपक जला रही है,
माँ ज्ञान की जगत में,
दीपक जला रही है ||
अज्ञात का अंधेरा,
अज्ञात का अंधेरा,
जग से मिटा रही है,
माँ ज्ञान की जगत में,
दीपक जला रही है ||
हृदय में वायस करती,
वाणी मधुर बनाएं,
भक्तों में स्नेह भरती,
दुश्मन को भी मिलाए ||
हृदय में वायस करती,
वाणी मधुर बनाएं,
भक्तों में स्नेह भरती,
दुश्मन को भी मिलाए ||
वीणा बजा के सबके,
मन को लुभा रही है,
माँ ज्ञान की जगत में,
दीपक जला रही है ||
अज्ञानी वेद पढ़ले,
गूंगे भजन सुनाए,
महिमा तेरी अजब है,
भटके डगर पे आए ||
अज्ञानी वेद पढ़ले,
गूंगे भजन सुनाए,
महिमा तेरी अजब है,
भटके डगर पे आए ||
कमल पे बैठ के मैया,
मुस्कुरा रही है,
माँ ज्ञान की जगत में,
दीपक जला रही है ||