लागी रे लगन ओ मां लिरिक्स | Lagi Re Lagan O Maa Lyrics
Lagi Re Lagan O Maa Lyrics In Hindi
लागी रे लगन ओ माँ,एक तेरे नाम की ||
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
भवसागर में भटकी- भटकी,
थकी जीव आत्मा,
ज्ञान का दीप जला दो,
मिले परमात्मा || हे माँ!..
पाई रे शरण तेरी,
कृपा श्रीराम की,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
गीत तेरा गाये बिना,
भक्ति नहीं जागती,
दिल में बसाये बिना,
शक्ति नहीं जागती || हे माँ!..
भगवती कहूँ की अम्बा,
जुदाई है नाम की,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
मन का सारा मैल धोकर,
निर्मल मन कीजिए,
निर्मल बनाकर मन को,
सद्बुद्धि दीजिए || हे माँ!..
अब न सताये हे माँ,
चिन्ता धन धाम की,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
एक तेरे दर्शन खातिर,
एक तेरे प्यार में,
ढूँढते फिरे हम तुझको,
सारे संसार में || हे माँ!..
तुझे नहीं पाया तो यह,
दुनियाँ किस काम की,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
ले चल हमें तू हे माँ,
जहाँ तेरा वास हो,
सब कुछ दिखाई दे माँ,
इतना प्रकाश हो || हे माँ!..
अन्तिम अभिलाषा है माँ,
पूर्ण विराम की,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
समझ नहीं आती हे माँ,
कहाँ तेरा वास है,
जिससे भी पूछूँ हे माँ,
करे परिहास है || हे माँ!..
अब तो है आशा केवल,
शान्तिकुञ्ज धाम की,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||
मुक्तक-
मानव भटक गया है पथ से,लोभ- मोह में भूला है,
कोई पद में, कोई धन में,
कोई मद में फूला है ||
हमको माँ तेरे चरणों में,
देती मुक्ति दिखाई है,
जिसने सच्चा किया समर्पण,
उसने सद्गति पाई है ||
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की,
कालिय मद मर्दन कियो,
कृष्ण कुँवर नन्दलाल,
नृत्यकाल पद घात से,
प्रकट भये सब ताल ||
रतन चतुर्दश मथि लियो,
देव- दनुज जेहिं काल,
प्रमुदित मन निरतत फिरे,
इमि प्रकटे सब ताल,
लागी रे लगन ओ माँ,
एक तेरे नाम की ||