चलो कुम्भ चलें लिरिक्स | Chalo Kumbh Chalein Lyrics

Chalo Kumbh Chalein Lyrics

Chalo Kumbh Chalein Lyrics In Hindi

यज्ञेन यज्ञमयजन्त,
देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् ||

ते ह नाकं महिमानः,
सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः,
चलो गोता खायें संगम में,
करे तीर्थ स्थावर जंगम में ||

हर हर हर नर नारायण हैं,
यही आदि अन्त पारायण है ||

जहां अगम,
अलौकिक ज्योत जले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

अंजुली मे भर कर,
उस जल को,
हम अमृत से भर जाएँगे ||

है धार धार उद्धार लिए,
हम पल भर में तर जाएँगे,
लिए मन में पावन भक्ति चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

जहां शंख प्राण तक,
गूँज उठे,
जहां भक्ति लहर,
उठ कर बोले,
जहां पुन्य जगे,
गहराई से,
और श्रद्धा भी,
आँखें खोले ||

सब उस दर्शन के लिए चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

जहां करतब अजब,
अखाड़ो के,
आँखो मे अचरज भरते है,
हुंकार भर के,
हर हर गंगे,
शाही स्नान,
साधुजन करते है ||

एक अनुभव अद्भुत करने चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले,
चलो कुम्भ चले ||

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