श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् लिरिक्स | Shri Vindhyeshwari Stotram Lyrics

Shri Vindhyeshwari Stotram Lyrics

Shri Vindhyeshwari Stotram Lyrics In Hindi

श्री  विन्ध्येश्वरी स्तोत्र माँ विन्ध्यवासिनी (माँ दुर्गा का स्वरूप) की स्तुति है। इसके नियमित पाठ से भक्त के जीवन में आध्यात्मिक, मानसिक और सांसारिक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधना में स्थिरता आती है। नकारात्मक शक्तियों, भय व बाधाओं से दिव्य संरक्षण मिलता है। आर्थिक समस्याएँ कम होती हैं एवं मुकदमे, नौकरी, व्यापार जैसे मामलों में अनुकूलता मिलती है।

ShreeVindhyeshwari Stotram

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी,
प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी,
बनेरणे प्रकाशिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||1||

त्रिशूल मुण्ड धारिणी,
धरा विघात हारिणी,
गृहे-गृहे निवासिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||2||

दरिद्र दुःख हारिणी,
सदा विभूति कारिणी,
वियोग शोक हारिणी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||3||

लसत्सुलोल लोचनं,
लतासनं वरप्रदं,
कपाल-शूल धारिणी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||4||

कराब्जदानदाधरां,
शिवाशिवां प्रदायिनी,
वरा-वराननां शुभां,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||5||

कपीन्द्न जामिनीप्रदां,
त्रिधा स्वरूप धारिणी,
जले-थले निवासिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||6||

विशिष्ट शिष्ट कारिणी,
विशाल रूप धारिणी,
महोदरे विलासिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ||7||

पुंरदरादि सेवितां,
पुरादिवंशखण्डितम्‌,
विशुद्ध बुद्धिकारिणीं,
भजामि विन्ध्यवासिनीं ||8||

इति श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् लिरिक्स सम्पूर्ण  ||


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